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17वीं शताब्दी में ओरछा के राजा रुद्र प्रताप सिंह के वंशज बुंदेला राजपूतों ने चंदेरी राज्य की स्थापना की थी, जिसका हिस्सा ललितपुर भी था। साल 1861 में बेतवा नदी के पश्चिम का हिस्सा (चंदेरी सहित) ग्वालियर राज्य को वापस दे दिया गया और बाकी बचे हिस्से का नाम ललितपुर जिला रखा गया। इसके बाद 1891 से 1974 तक यह झांसी जिले का हिस्सा रहा, और 1974 में इसे दोबारा एक स्वतंत्र जिला बनाया गया। ललितपुर ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध है |देवगढ़: यह स्थान अपने गुप्तकालीन दशावतार मंदिर और प्राचीन जैन मंदिरों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। पाली का नीलकंठेश्वर मंदिर: यह चंदेल राजाओं के समय की बेहतरीन वास्तुकला का उदाहरण है। पावागिरी और सीरोनजी: यह क्षेत्र के बेहद पवित्र और प्रमुख जैन अतिशय क्षेत्र (तीर्थ स्थल) हैं।